देश में खड़ा हो सकता है बिजली संकट, 72 पावर प्लांट में बचा सिर्फ इतने दिनों का कोयला

भारत में बिजली संकट

भारत में 75 फ़ीसदी बिजली कोयले से बनती है। ऐसे में खबरें आ रही हैं कि देश में इस वक्त कम से कम 72 पावर प्लांट में 3 दिन से भी कम का कोयला का स्टॉक बचा है। भारत में कोयले से बिजली बनाने वाले पावर प्लांट इस वक्त कोयले की कमी से जूझ रहे हैं। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के अनुसार भारत में कोयला से बिजली बनाने वाले 135 पावर प्लांट में से 16 के पास कोयले का स्टॉक पूरी तरह से खत्म हो गया है।

बता दें कि भारत में 70 फ़ीसदी बिजली कोयले से ही बनाई जाती है। बिजली बनाने में भारत का 75% कोयला लग जाता है। कोयले से बनी बिजली सस्ती पड़ती है। दरअसल कोरोनावायरस की दूसरी लहर के बाद इंडस्ट्रियल पावर की डिमांड काफी बढ़ गई है। इसकी वजह से कोयले के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी गैप आ गया है। इससे कोयले के आयात में भी असर पड़ा है।

कोल इंडिया के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले की कीमत बढ़ने से पावर प्लांट में आयात होने वाले कोयले पर निर्भरता कम कर दी है। जिसकी वजह से भारत में मौजूद कोयला भंडार और खदानों पर खनन को लेकर दबाव बढ़ गया है। बता दें कि कोल इंडिया लिमिटेड भारत की सबसे बड़ी कोयला कंपनी है। कोल इंडिया ही भारत में खदानों से निकाले जाने वाले कोयले की कीमत तय करता है।

चीन में पहले से बिजली संकट

भारत में बिजली संकट की खबरों के बीच चीन में पहले से ही बिजली संकट है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले की कीमत बढ़ने से चीन भी बिजली संकट से जूझ रहा है। इसकी वजह से चीन को बीजिंग और शंघाई में ब्लैक आउट करना पड़ा था। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत सरकार ऐसी स्थिति आने नहीं देगी।

उनका कहना है कि कोरोना महामारी के बाद देश की अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर लौट रही है। ऐसे में यदि बिजली संकट की वजह से अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचता है तो उसे फिर से पटरी पर लौटने में काफी संघर्ष करना पड़ेगा। सरकार ऐसी किसी भी स्थिति का सामना करना नहीं चाहेगी। विशेषज्ञों के मुताबिक पहले से ही खुदरा महंगाई की मार झेल रही जनता के लिए बिजली संकट नए महंगाई का द्वार खोल सकता है।